राजस्थान में भी अब स्थानीय युवाओं को मिलेगी सरकारी नौकरी में तरजीह, जानिए गहलोत सरकार का प्लान

humara bikaner
humara bikaner
humara bikaner
humara bikaner

राजस्थान में जहां अब सरकार की ओर से लाखों नौकरियों का पिटारा खोला जा रहा है। वहीं उसके साथ ही प्रदेश में राज्य सरकार एक और कवायद में जुटी है, जिससे आगामी दिनों में राजस्थान की सरकारी नौकरियों में प्रदेश के युवाओं को ही प्राथमिकता मि्ल सकें। राज्य सरकार की ओर से इसे लेकर 15 राज्यों की स्टडी भी की जा रही है। आपको बता दें कि देश के कई राज्यों में कई विभागों में सिर्फ स्थानीय युवाओं को ही तरजीह दी जाती है। लिहाजा अब गहलोत सरकार भी स्टडी के माध्यम से इसी दिशा में कदम बढ़ा रही है।

की जा रही है 15 राज्यों की स्टडी
मिली जानकारी के अनुसार दो दिन पहले सीएम अशोक गहलोत की ओर से इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद से मुख्यमंत्री कार्यालय व कार्मिक विभाग के अफसर मप्र, ओडिशा, हिमाचल, हरियाणा, पंजाब, प. बंगाल, असम, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र सहित 15 से अधिक राज्यों के प्रावधानों की स्टडी करने में जुट गए हैं। जल्द स्टडी को अंतिम रूप देकर फाइनल कर दिया जाएगा।
पहले कानून बदलेगी, फिर होगी नई भर्ती
यह भी जानकारी मिली है कि बार-बार भर्तियों में विज्ञप्ति में संशोधन के पेंच उलझते हैं। ऐसे में सरकार की कोशिश है कि स्थानीय युवाओं को नौकरी में तरजीह देने वाला कानून लाया जाए, ताकि स्थानीय युवाओं में ज्यादा से ज्यादा नौकरी मिले। साथ ही आगामी 2023 चुनाव में भी इसका फायदा उठाया जा सके।
मिली जानकारी के अनुसार कई राज्यों के कई विभाग में स्थानीय युवाओं के लिए पद आरक्षित है। हिमाचल, हरियाणा, उत्तराखंड जैसे कई राज्यों में बहुत पहले से ही पटवारी, तृतीय श्रेणी शिक्षक, पशुधन सहायक, कृषि पर्यवेक्षक, महिला पर्यवेक्षक आंगनबाड़ी, पूर्व प्राथमिक शिक्षक व लिपिक जैसी भर्तियों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाती है। इनमें बाहरी युवा शामिल नहीं करते है।
(न्यूज़ सोर्स- नवभारत टाइम्स)

humara bikaner
Load More Related Articles
Load More By Jitu Bikaneri
Load More In राजस्थान

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

राजस्थान: कम हुई महामारी की मार, बेरोजगारों को अवसर मिल रहे अपार

जयपुर। उत्तर भारत के अधिकां‏श राज्यों में बेरोजगारी की स्थिति चिंताजनक है। हालांकि आंकड़े …